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मजदूर, युवा और किसान: दुनिया में किस देश ने आम आदमी की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाया?

आर्थिक विकास का असली पैमाना जीडीपी नहीं, वह जीवन है जो एक मजदूर, एक युवा और एक किसान जी रहा है किसी देश की आर्थिक सफलता को मापने के लिए हमारे पास जीडीपी, शेयर बाजार, विदेशी निवेश, प्रति व्यक्ति आय और निर्यात जैसे दर्जनों आंकड़े हैं। लेकिन आम आदमी की जिंदगी का एक अधिक सीधा सवाल भी हो सकता है— वहां मजदूर कितना सुरक्षित है, युवा को काम और भविष्य की कितनी संभावना दिखाई देती है और किसान अपनी जमीन से सम्मानजनक आय कमा पा रहा है या नहीं? यही तीन सवाल दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक अलग नजर से देखने का रास्ता खोलते हैं। मजदूर को केवल रोजगार नहीं चाहिए; उसे उचित मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और काम की गरिमा चाहिए। युवा को केवल डिग्री नहीं चाहिए; उसे ऐसा श्रम बाजार चाहिए जिसमें शिक्षा के बाद आर्थिक स्वतंत्रता संभव हो। किसान को केवल फसल का उत्पादन नहीं करना; उसे बाजार, तकनीक, जोखिम से सुरक्षा और अपनी मेहनत का पर्याप्त प्रतिफल भी चाहिए। इस कसौटी पर दुनिया की तस्वीर दिलचस्प है। पहला आंकड़ा ही भ्रम तोड़ देता है अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के 2026 के आकलन के अनुसार दुनिया में बेरोजगारी दर लगभग 4.9 प्रतिशत के आसप...

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