मतदाता जागरूकता पर एकाधिकार क्यों? लोकतंत्र में नागरिक संगठनों की भूमिका का सवाल
चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन मतदाता को जागरूक बनाने का काम केवल सरकारी संस्थाओं तक सीमित नहीं रह सकता। लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान की एक प्रक्रिया नहीं है। यह नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने, सत्ता से सवाल पूछने और सरकार की दिशा तय करने का अवसर देता है। लेकिन इस प्रक्रिया की सार्थकता तभी है, जब मतदाता अपने अधिकारों, विकल्पों और चुनाव से जुड़े प्रलोभनों के प्रति जागरूक हो। सवाल यह है कि मतदाता को जागरूक बनाने की जिम्मेदारी क्या केवल निर्वाचन आयोग की है या नागरिक संगठन और सामाजिक संस्थाएं भी इसमें अपनी भूमिका निभा सकते हैं? राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की अनुमति से जुड़ा मामला इसी बुनियादी सवाल को सामने लाता है। 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा रॉय और निखिल डे से जुड़े मामले में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अभियान की अनुमति देने से इनकार किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया और आयोग को इस अनुरोध पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मतदाता जागरूकता अभियान चला...