निवेश पोर्टफोलियो को मज़बूत बनाने के लिए एसेट एलोकेशन के 6 सुनहरे नियम
निवेश पोर्टफोलियो को मज़बूत बनाने के लिए एसेट एलोकेशन के 6 सुनहरे नियम
निवेश में सफलता सिर्फ सही शेयर या म्यूचुअल फंड चुनने से नहीं मिलती, बल्कि इस बात से मिलती है कि आपने अपना पैसा किस अनुपात में अलग-अलग एसेट्स में बांटा है। इसी रणनीति को एसेट एलोकेशन कहा जाता है। सही एलोकेशन जोखिम को नियंत्रित करता है और लंबे समय में स्थिर रिटर्न देने में मदद करता है।
नीचे दिए गए छह नियम हर निवेशक को अपनाने चाहिए।
1. अनुमान नहीं, नियमों पर आधारित निवेश करें
मार्केट कब ऊपर जाएगा और कब नीचे—इसका सटीक अनुमान कोई नहीं लगा सकता। इसलिए निवेश को भविष्यवाणियों के बजाय पहले से तय नियमों पर आधारित रखें। जब आपकी रणनीति स्पष्ट होती है, तो डर और लालच जैसे भावनात्मक फैसले अपने-आप कम हो जाते हैं।
2. निवेश में भावनाओं की भूमिका को समझें
अक्सर निवेशक गिरते बाज़ार में घबरा जाते हैं और चढ़ते बाज़ार में ज़रूरत से ज़्यादा जोखिम ले लेते हैं। यह इंसानी स्वभाव है। लेकिन एक संतुलित एसेट एलोकेशन आपको भावनाओं से ऊपर उठकर अनुशासित निवेशक बनने में मदद करता है।
3. ऐसे एसेट चुनें जो एक-दूसरे पर निर्भर न हों
सभी एसेट एक साथ नहीं चलते। शेयर, डेट, सोना और नकद—इनका व्यवहार अलग-अलग होता है। जब आप ऐसे एसेट्स को मिलाते हैं जो एक-दूसरे से कम जुड़े हों, तो पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव कम होता है और जोखिम बेहतर तरीके से संभलता है।
4. नियमित री-बैलेंसिंग ज़रूरी है
समय के साथ कुछ एसेट तेज़ी से बढ़ जाते हैं और कुछ पीछे रह जाते हैं। इससे आपका मूल एलोकेशन बिगड़ सकता है। री-बैलेंसिंग का मतलब है—समय-समय पर पोर्टफोलियो को फिर से उसी अनुपात में लाना, जो आपने तय किया था। यही प्रक्रिया जोखिम को नियंत्रण में रखती है।
5. उम्र नहीं, जोखिम सहने की क्षमता देखें
यह मान लेना कि उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी पूरी तरह कम कर देनी चाहिए—हर किसी पर लागू नहीं होता। सही फैसला आपकी आर्थिक स्थिति, आय की स्थिरता, जिम्मेदारियों और मानसिक तैयारी पर निर्भर करता है। एसेट एलोकेशन हमेशा आपकी जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार होना चाहिए।
6. टैक्स से बचने के बजाय टैक्स को समझदारी से मैनेज करें
सिर्फ टैक्स बचाने के चक्कर में गलत निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है। बेहतर तरीका यह है कि आप निवेश का चयन अपने लक्ष्य के अनुसार करें और साथ-साथ टैक्स को कुशल तरीके से मैनेज करें, ताकि रिटर्न पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
क्यों एसेट एलोकेशन सबसे ज़्यादा अहम है?
लंबे समय में पोर्टफोलियो का प्रदर्शन इस बात से ज्यादा तय होता है कि पैसा कहां-कहां लगाया गया है, न कि केवल किस स्कीम या शेयर में। सही एसेट एलोकेशन आपको
जोखिम नियंत्रित करने
बाज़ार की अनिश्चितता से बचने
और लक्ष्य-आधारित निवेश करने
में मदद करता है।
एसेट एलोकेशन कोई एक-बार का फैसला नहीं, बल्कि एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जैसे-जैसे आपकी ज़िंदगी, आय और लक्ष्य बदलते हैं, वैसे-वैसे आपके निवेश का संतुलन भी बदलना चाहिए। यही समझदारी आपको एक मज़बूत और टिकाऊ निवेश पोर्टफोलियो तक ले जाती है।
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